जनमानस मे लोकप्रिय कथाएँ। मेरा है तभी तो खोने का डर है। यह ही तो मोह है। भविष्य के प्रति शंकित रहने के कारण ही तो मेरा है का प्रलाप है। हमारा ठाकुर जी के प्रति न तो समर्पण है न ही विश्वास है।
बांके बिहारी जी के दुर्लभ दर्शन I